माँ का साया
माँ का साया
सहमा सा एक नव दिवस
उस वक़्त स्पर्श किया मैंने अपनी आँखों को
महसूस कुछ गीला है
जब छुआ मैंने पलकों को
अब ये ऐसा क्यों है?
अविदित मत हो इतना भी
वो रैन का रोना , छलकी बूंदो में सोना
वो अम्बिका की अनमोल माया
जरा सा बिछड़ गया बस माँ का साया ।
बचपन जैसे याद बन गया
वो कालिमा का टीका कहाँ है अब
कहाँ गया वो आनंद उन हाथों का
करीना सिरोरुह सहलाने का कहाँ है अब
वो छोटी - छोटी गलतियों
स्नेह भरी मार कहाँ है अब
वो खुशियां जो माँ के कदमो में होती
आशिर्वाद अनुराग संयुक्त
वो माँ का साया कहा है अब ।
अतिशय दिव्य थी वो माँ की पनाह
अब तो जैसे बेपनाह ही रहना है
विलास नही मिलता माँ के अलावा
सुनते अब परुष ताने ही रहना है
चलते - चलते गिर जाना
ओह ! माँ बोलना स्वभाविक था
नहीं कुछ अब ऐसा भी ,
बस नीरव ही रहना है
जिंदगी गमगीन गीत बन गयी
अब तो इसे ही गाते रहना है
मैंने सुना है नीरज
आविर्भाव मलिन जल से होता है
जीवन में अब महसूस
माँ के साये को करते रहना है ।
कलम --
नीरज नैनकवाल
सहमा सा एक नव दिवस
उस वक़्त स्पर्श किया मैंने अपनी आँखों को
महसूस कुछ गीला है
जब छुआ मैंने पलकों को
अब ये ऐसा क्यों है?
अविदित मत हो इतना भी
वो रैन का रोना , छलकी बूंदो में सोना
वो अम्बिका की अनमोल माया
जरा सा बिछड़ गया बस माँ का साया ।
बचपन जैसे याद बन गया
वो कालिमा का टीका कहाँ है अब
कहाँ गया वो आनंद उन हाथों का
करीना सिरोरुह सहलाने का कहाँ है अब
वो छोटी - छोटी गलतियों
स्नेह भरी मार कहाँ है अब
वो खुशियां जो माँ के कदमो में होती
आशिर्वाद अनुराग संयुक्त
वो माँ का साया कहा है अब ।
अतिशय दिव्य थी वो माँ की पनाह
अब तो जैसे बेपनाह ही रहना है
विलास नही मिलता माँ के अलावा
सुनते अब परुष ताने ही रहना है
चलते - चलते गिर जाना
ओह ! माँ बोलना स्वभाविक था
नहीं कुछ अब ऐसा भी ,
बस नीरव ही रहना है
जिंदगी गमगीन गीत बन गयी
अब तो इसे ही गाते रहना है
मैंने सुना है नीरज
आविर्भाव मलिन जल से होता है
जीवन में अब महसूस
माँ के साये को करते रहना है ।
कलम --
नीरज नैनकवाल
Great
ReplyDeleteGud
ReplyDeleteGud
ReplyDeleteSuperb bhaiii
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