सच बोलकर रुलाने वाले..

सोचो तो बहुत कुछ, वरना कुछ भी नहीं,    ज़्यादा नहीं तो, थोड़ा ही सहीमगर सच्चाई से वाक़िफ तो हम होते हैं, और हां एक बात और सुनो...     मिलेंगे बहुत शख़्स झूठ बोलकर हंसाने वाले,      लेकिन सच बोलकर रुलाने वाले बहुत कम होते हैं..

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