तुम्हारे निहारने से। (A heartly Poem)
मेरी प्यासी आंखों में समंदर- सा छा जाता है
और छलक जाता है वो पानी का दरिया,
जिसमे तुम्हारी हर अदा छिपी है
अब और क्या तारीफ़ करू,
मुझे तो सुकून मिल जाता है
बस तुम्हारे पलट कर निहारने से...
अब सुनना पसंद नहीं है
वो सितार का संगीत,
क्योंकि तुम्हारी पायलों की
झनझनाहट जो करीब है,
अब देखना पसंद नहीं वो T.V वाला कथक,
क्योंकि तुम्हारी उंगलियों के नृत्य में जो संजोग है
मुझे कुछ तो मिल जाता है,
जब घर के आंगन में तुम बिखरी रहती हो
और बहुत कुछ मिल जाता है,
बस तुम्हारे पलट कर निहारने से..
बहुत सुंदर चित्रकारी छोड़ दी है मैंने,
बस अब तुम्हारी तस्वीर बनाने में लगा हूं मै,
नहीं है हिम्मत तुमसे कुछ जानने की मेरी
और कभी आओ ना तहख़ाने में,
देखो तस्वीर से ही पूछने में लगा हूं मै,
चाहे कुछ मत कहना,
चाहे दूर ही रहना
हां रौनक आ जाएगी तुम्हारे आ जाने से,
सच कहूं तो एक ख्वाब-सा पूरा होता है
बस तुम्हारे पलट कर निहारने से....
और छलक जाता है वो पानी का दरिया,
जिसमे तुम्हारी हर अदा छिपी है
अब और क्या तारीफ़ करू,
मुझे तो सुकून मिल जाता है
बस तुम्हारे पलट कर निहारने से...
अब सुनना पसंद नहीं है
वो सितार का संगीत,
क्योंकि तुम्हारी पायलों की
झनझनाहट जो करीब है,
अब देखना पसंद नहीं वो T.V वाला कथक,
क्योंकि तुम्हारी उंगलियों के नृत्य में जो संजोग है
मुझे कुछ तो मिल जाता है,
जब घर के आंगन में तुम बिखरी रहती हो
और बहुत कुछ मिल जाता है,
बस तुम्हारे पलट कर निहारने से..
बहुत सुंदर चित्रकारी छोड़ दी है मैंने,
बस अब तुम्हारी तस्वीर बनाने में लगा हूं मै,
नहीं है हिम्मत तुमसे कुछ जानने की मेरी
और कभी आओ ना तहख़ाने में,
देखो तस्वीर से ही पूछने में लगा हूं मै,
चाहे कुछ मत कहना,
चाहे दूर ही रहना
हां रौनक आ जाएगी तुम्हारे आ जाने से,
सच कहूं तो एक ख्वाब-सा पूरा होता है
बस तुम्हारे पलट कर निहारने से....
हां तुम्हारे पलट कर निहारने से....
✍️Kavi Neeraj Nainkwal
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